180 भ्रष्ट देशों में भारत 96वें स्थान पर, मोदी सरकार के कार्यकाल में नहीं हुआ कोई सुधार, 2013 में 94वें स्थान पर था भारत।

180 भ्रष्ट देशों में भारत 96वें स्थान पर, मोदी सरकार के कार्यकाल में नहीं हुआ कोई सुधार, 2013 में 94वें स्थान पर था भारत।

Corruption Perceptions Index 2024: ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) की रिपोर्ट मंगलवार को जारी की गई। इस रिपोर्ट में भारत को 180 देशों में 96वें नंबर पर रखा गया है। यानी 95 देशों में भारत से कम भ्रष्टाचार है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट 2024 के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (CPI) में भारत का स्कोर एक प्वाइंट और कम होकर 38 हो गया है। साल 2023 में भारत का स्कोर 39 और 2022 में 40 था। 2023 में भारत की रैकिंग 93 थी। रैकिंग में लगातार गिरना भारत के लिए चिंता की बात बनी हुई है।

मोदी सरकार समय समय पर भारत में भ्रष्टाचार को खत्म करने के दावे करती रही है, लेकिन रैंकिंग का गिरना उन दावों पर सवाल उठाता है। इस रिपोर्ट में पड़ोसी देश चीन 76वें नंबर पर बरकरार है। उसकी रैंकिंग में 2 साल से बदलाव नहीं आया है। वहीं, पाकिस्तान में भ्रष्टाचार की बद्तर स्थिति है। वहां भी भ्रष्टाचार बढ़ा है। वह 133 से 135वें पायदान पर आ गया है। श्रीलंका 121वें और बांग्लादेश 149वें स्थान पर काबिज है। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे कम भ्रष्टाचार डेनमार्क में है। इसके बाद फिनलैंड और फिर सिंगापुर को जगह मिली है। विशेषज्ञों और कारोबारियों के अनुसार, CPI इंडेक्स में 180 देशों को शामिल किया गया है। इसमें उन देशों में सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के आधार पर कई तरह के स्टैंडर्ड को आधार बनाकर इस रिपोर्ट को तैयार किया जाता है और फिर रैंकिंग की जाती है। इसका स्केल 0 से 100 के बीच होता है। शून्य को सबसे ज्यादा भ्रष्ट और 100 को सबसे कम भ्रष्ट माना जाता है।

भ्रष्टाचार इंडेक्स (CPI) में भारत का बुरा प्रदर्शन

भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए भारत में कई तरह के अभियान चलाए जाते हैं। देश की केन्द्र सरकार से लेकर अलग अलग राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर अभियानों का संचालन करती हैं। लेकिन हाल ही की रिपोर्ट बड़ा हैरान करती है कि इन अभियानों के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ है। भारत से भी ज्यादा बुरा हाल पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों का है। बांग्लादेश को 149वें स्थान पर रखा गया है। यानि बांग्लादेश में भ्रष्टाचार चरम पर है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि दक्षिण एशिया में भ्रष्टाचार बहुत बड़ी समस्या बन गई है। कई देशों का भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की कोशिशें काफी खराब हैं।

भ्रष्टाचार का औसत स्तर

रिपोर्ट में ग्लोबल करप्शन का औसत स्कोर अभी भी 43 पर स्थिर बना हुआ है। जबकि दो तिहाई दुनिया का औसत स्कोर 50 से कम है। यानि दो तिहाई दुनिया में भ्रष्टाचार काफी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने चेतावनी दी है भ्रष्टाचार का स्तर चिंताजनक स्तर पर बना हुआ है। जिसकी वजह से जलवायु परिवर्तन और मानवाधिकार उल्लंघन जैसे प्रमुख चुनौतियों से जूझने की क्षमता पर गंभीर असर पड़ता है।

PM मोदी के कार्यकाल में भ्रष्टाचार नहीं हुआ कम

2005 से लेकर 2013 तक UPA की सरकार और मौजूदा NDA सरकार की तुलना की जाए तो स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। 2006-07 में भ्रष्टाचार के मामले में जरूर रैंकिंग सुधरी है। उस दौरान भारत 70वें और 72वें स्थान पर था। UPA शासन के अंतिम समय में यानी 2013 में भारत 94वें स्थान पर आ गया। वहीं NDA के कार्यकाल में सबसे अच्छी स्थिति 2015 में रही, तब भारत वर्ल्ड रैंकिंग में 76वें स्थान पर पहुंचा था।