म्यांमार में आए भूकंप से कांपी धरती, 7.7 तीव्रता वाले भूकंप से कई इमारतें ढहीं, बड़े नुकसान की आशंका; Delhi-NCR में भी महसूस किए झटके।

म्यांमार में आए भूकंप से कांपी धरती, 7.7 तीव्रता वाले भूकंप से कई इमारतें ढहीं, बड़े नुकसान की आशंका; Delhi-NCR में भी महसूस किए झटके।

Magnitude 7.7 Earthquake In Myanmar: आज 28 मार्च को भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में एक के बाद एक भूकंप के दो तेज झटके महसूस किए गए। शुक्रवार को लगे भूकंप के ये झटके इतने तेज थे कि भयग्रस्त लोगों को अपने घरों-दफ्तरों से बाहर निकलना पड़ा। मिली जानकारी के अनुसार, पहला भूकंप का झटका सुबह 11:50 पर आया, जिसकी तीव्रता 7.7 मापी गई। इसके बाद दूसरा झटका दोपहर 12:02 पर आया, जिसकी तीव्रता 7 मापी गई।

म्यांमार में भूकंप (Earthquake in Myanmar) के झटके थाईलैंड तक महसूस किए गए। बैंकॉक में इसका सबसे ज्यादा असर दिखाई दिया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (National Center for Seismology) के मुताबिक, रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 7.7 और 7.0 रही। दोनों ही भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर गहराई में था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि म्यांमार में रुक-रुककर लगातार भूकंप के झटके लग रहे हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कई बड़ी इमारतों को नुकसान हुआ है।

म्यांमार में आए भूकंप का कहां था का केंद्र?

म्यांमार का सागाइंग भूकंप का केंद्र था। भूकंप के झटके इतने ज्यादा तेज थे कि म्यांमार के मांडलेय में इरावडी नदी पर कथित तौर पर लोकप्रिय एवा ब्रिज गिर गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, म्यांमार में आए भूकंप के झटके चीन और ताइवान के कुछ इलाकों में भी भूकंप महसूस किए गए। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में (Earthquake in Delhi NCR) भी भूकंप के झटके 15-20 सेकंड तक महसूस किए गए।

पृथ्वी के भीतर मचती है उथल-पुथल

भूवैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी जितनी बाहर से शांत और स्थिर नजर आती है उतनी है नहीं। उसके भीतर हमेशा उथल-पुथल मची रहती है। पृथ्वी के अंदर भूगर्भीय प्लेटें टकराती रहती हैं, जिसकी वजह से हर साल अलग-अलग देशों में भूकंप आते रहते हैं। कई भूविज्ञान विशेषज्ञों के मुताबिक, हमारी पृथ्वी टेक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है। इसके नीचे तरल पदार्थ (लावा) होता है। यह प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। जब यह प्लेटें आपस में टकराती हैं, तो ऊर्जा निकलती है, जिसकी वजह से भूकंप आता है।

भूकंप से क्यों मचती है तबाही?

भूविज्ञान के अनुसार, धरती के नीचे स्थित भूगर्भीय प्लेटें बहुत धीमी गति से घूमती रहती हैं। यह हर वर्ष अपने स्थान से 4-5 मिमी तक खिसकती हैं। इस दौरान कुछ प्लेटें एक-दूसरे से दूर हो जाती है। इसके साथ ही कुछ एक के नीचे खिसक जाती हैं, जिनके खिसकने और टकराने की प्रक्रिया की वजह से ही भूकंप आता है। जिस स्थान पर धरती के अंदर चट्टानें टूटती या टकराती हैं, वह स्थान भूकंप का केंद्र होता है। इसे हाइपोसेन्टर कहते हैं। इस केंद्र से भूकंप की ऊर्जा तरंगों के रूप में फैलती हैं। तरंगों के धरती के सतह तक पहुंचने पर कंपन महसूस होता है। जिस स्थान पर यह यह ऊर्जा सतह को काटती है, उसे एपिसेंटर कहा जाता है। यह स्थान भूकंप के सबसे नजदीक और यहां पर प्रभाव पड़ता है।