प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर भारत के उत्तरप्रदेश प्रांत के अयोध्या जिले में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 18वीं सदी में नवाब शुजाऊद्दौला ने अपने पुत्र की असाध्य बीमारी से मिली मुक्ति से प्रसन्न होकर कराया था। दरअसल, जब नवाब शुजाऊद्दौला के शहजादे गंभीर बीमार हुए तो चिकित्सकों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे। नवाब परेशान हो गये तो हिंदू मंत्रियों ने बाबा अभयराम और उन पर हनुमान जी की कृपा के बारे में नवाब को बताया। कहते हैं कि जब अभयराम ने कुछ मंत्र पढ़कर हनुमानजी के चरणामृत का जल नवाब के बेटे पर छिड़का तो उसकी सांसे लौट आईं। नवाब ने इसे चमत्कार माना और अभयराम जी से हनुमानगढ़ी बनवाने की बात कही।
मान्यतानुसार, रावण पर विजय प्राप्त कर भगवान राम जब अयोध्या लौटे तब उन्होंने हनुमान जी को विश्राम के लिये इसी स्थान को दिया। यहीं से हनुमान रामकोट की सुरक्षा करते थे और अमर होने की वजह से आज भी इस स्थान पर सूक्ष्म रूप से विद्यमान हैं। इस मंदिर में 76 सीढियां हैं। पूरा परिसर 52 बीघा में फैला हुआ है। सबसे रहस्यमयी बात यहां की पूजा विधि है जो बहुत ही गुप्त है। यह गुप्त पूजा रोज सुबह 3 बजे होती है जिसमें 8 पुजारी शामिल होते हैं। बाबा हनुमान जी इन पुजारियों को साक्षात दर्शन देते हैं परंतु इस दिव्य अनुभव को पुजारियों को गुप्त रखने के लिए बोला जाता है। मान्यता है, बिना हनुमानगढ़ी पर जाए राम लला के दर्शन अधूरे माने जाते हैं।
हनुमान गढ़ी मंदिर (Shri Hanuman Garhi Mandir) को लेकर कई कहानियां और मान्यताएं हैं। कहते हैं कि लंका से लौटने के बाद भगवान राम ने अपने प्रिय भक्त हनुमान को यह जगह रहने के लिए दी थी। इस लिए इस जगह को हनुमानजी का घर भी कहते हैं। शास्त्रानुसार, भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को कहा था कि जब भी कोई अयोध्या में मेरे दर्शन करने आएगा, उससे पहले उसे तुम्हारे यानी हनुमानजी के दर्शन करने होंगे। इसलिए आज भी लोग रामलला के दर्शन से पहले हनुमानगढ़ी जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान जी अपने भक्तों की मनोकामना जरूर पूरे करते हैं। एक चोला चढ़ाने से व्यक्ति को हर दोष से मुक्ति मिल जाती है। पापों से मुक्ति पाने के लिए सरयू नदी में स्नान करने की भी मान्यता है, लेकिन इससे पहले लोगाें को बजरंगबली से आज्ञा लेनी पड़ती है। हनुमानगढ़ी में हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिणमुखी है। यहां दिखने वाले हनुमान निशान लोगों को आश्चर्यचकित कर देते हैं। यह एक 4 मीटर चौड़ा और 8 मीटर लंबा ध्वज है, जो लंका से विजय का प्रतीक है। इसके साथ एक गदा और त्रिशूल भी रखा है। कोई भी शुभ कार्य करने से पहले अयोध्या में हनुमान निशान ले जाया जाता है। लगभग 20 लोग इस निशान को हनुमानगढ़ी से राम जन्म भूमि तक तक ले जाते हैं। पहले इसकी पूजा होती है और फिर किसी कार्य की शुरुआत की जाती है।