भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर तमिलनाडु प्रांत के तिरुचिरापल्ली शहर के श्रीरंगम नामक एक द्वीप पर स्थित है। श्रीरंगनाथ स्वामी मंदिर दुनियां का सबसे पूजनीय मंदिर है। यह मंदिर करीब 156 एकड़ में फैला है। हालांकि, इससे भी बड़े मंदिर हैं लेकिन वो मंदिर अब पर्यटन स्थल भी बन चुके हैं। इस मंदिर का नाता त्रेतायुग से भी जुड़ा है। लंका जाते समय भगवान राम ने इस मंदिर में लंबे समय तक आराधना की थी। और लंका पर विजय के बाद इस मंदिर को विभीषण को सौंप दिया था। इस मंदिर को ‘श्रीरंगम मंदिर’, ‘भूलोक वैकुण्ठ’, ‘तिरुवरंगम तिरुपति’, पेरियाकोइल’ जैसे कई नामों से जाना जाता है।
मंदिर के पुजारी पार्थसारथी के अनुसार, मुख्य मंदिर को रंगनाथ स्वामी मंदिर कहा जाता है, जो भगवान का शयन कक्ष है। इस मंदिर में विष्णु की प्रतिमा शयन मुद्रा में है। साथ ही विष्णु की खड़ी प्रतिमा, कृष्ण, लक्ष्मी, सरस्वती, श्रीराम, नरसिम्हा के विविध रूप और वैष्णव संतों की प्रतिमाएं भी हैं। मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में गंग राजवंश के दौर में हुआ था। 16वीं और 17वीं शताब्दी में भी मंदिर परिसर में कई निर्माण कार्य किए गए।
मंदिर परिसर में अलग-अलग देवी देवताओं के 80 पूजा स्थल हैं। दीवारों पर सिर्फ तमिल ही नहीं, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, मराठी और ओडिया भाषा में 800 से अधिक शिलालेख अंकित हैं। इनकी लिपि तमिल और ग्रंथ है। ग्रंथ लिपि का इस्तेमाल तमिल और मलयालम भाषाविद् छठी सदी से ही संस्कृत लिखने के लिए करते रहे हैं।
मान्यता है कि गोदावरी तट पर गौतम ऋषि का आश्रम था। उन्होंने गोदावरी नदी को देव लोक से बुलाया था। बाद में गौ हत्या के आरोप पर गौतम ऋषि को यह आश्रम छोड़ना पड़ा था। उन्होंने श्रीरंगम आकर भगवान विष्णु की तपस्या की। कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर रंगनाथ स्वामी के रूप में उन्हें यहीं पर दर्शन दिए थे। बाद में यहां मंदिर का निर्माण हुआ, जो आज विशाल परिसर में बदल चुका है। मंदिर इतना बड़ा है कि अगर आप इसे पूरा घूमना चाहें तो कब सुबह से शाम हो जायेगी ये भी पता नहीं चलेगा।