भगवान सूर्य को समर्पित यह ऐतिहासिक मंदिर भारत के गुजरात प्रांत के मेहसाणा जिले में पुष्पावती नदी के किनारे मोढेरा गाँव में स्थित है। इसे सोलंकी वंश के राजा ‘भीमदेव प्रथम’ ने 1026 ई० में बनवाया था। स्कंदपुराण और ब्रह्मपुराण में इस स्थान का उल्लेख मिलता है। कहा गया है कि ‘मोढेरा’ के आस पास के स्थान को ‘धर्मारण्य’ नाम से जाना जाता था। भगवान राम के पूछने पर कि मुक्ति के लिये सर्वश्रेष्ठ स्थान कौन सा है तब महर्षि वशिष्ठ ने इसी स्थान पर जाकर ध्यान लगाने का सुझाव दिया था।
मंदिर की वास्तुकला सोलंकी वास्तुकला शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मंदिर में रामायण और महाभारत सहित भारतीय पौराणिक कथाओं के दृश्यों को दर्शाती हुई जटिल नक्काशी की गई है। वास्तुकला का अप्रतिम उदहारण मोढ़ेरा का यह सूर्य मंदिर अंतरिक्ष के गूढ़ रहस्यों को समाहित किये है। मंदिर में कुल 52 स्तंभ हैं जो साल में 52 सप्ताहों को दर्शाते हैं। यहाँ के सूर्य कुंड में 108 मंदिर बने हैं जो 12 राशियों और 9 ग्रहों का गुणनफल है। इनमें कई मंदिर भगवान गणेश और शिव को समर्पित हैं।
मोढेरा सूर्य मंदिर (Modhera Sun Temple)की संरचना ऐसी की गई है कि विषवों के समय, यानी 21 मार्च व 21 सितम्बर के दिन सूर्य की प्रथम किरणें गर्भगृह में स्थित मूर्ति के ऊपर पड़ती हैं। यह मंदिर तीन मुख्य भागों में बंटा है। मंदिर परिसर को तीन भागों में विभाजित किया गया है – ‘सूर्य कुंड’ (एक बड़ा आयताकार सीढ़ीदार तालाब), ‘सभा मंडप’ (सभा हॉल), और ‘गुडा मंडप’ (गर्भगृह)। मंदिर इस तरह से स्थित है कि विषुव के दौरान सूर्य की पहली किरणें गर्भगृह में देवता पर पड़ती हैं। सूर्य मंदिर के ठीक सामने की सीढ़ियों पर शेषशैया पर विराजमान भगवान विष्णु का मंदिर है। एक मंदिर शीतला माता का भी है। मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा पथ है।